जीवन में हैं चार चौराहे
और अनगिनत राहें
जिनपर चलते-चलते
दिन-माह-वर्ष बीत जाता है
जीवन-घट रीत जाता है।।
और अनगिनत राहें
जिनपर चलते-चलते
दिन-माह-वर्ष बीत जाता है
जीवन-घट रीत जाता है।।
रिश्ते-नाते, जान-पहचान औ हालचाल सब जुड़े टके से। टका नहीं यदि जेब में तो रहते सभी कटे-कटे से।। मधुमक्खी भी वहीं मँडराती मकरन्द जहाँ वह पाती ...
No comments:
Post a Comment