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Tuesday, November 21, 2017

प्रवासी पक्षी

प्रवासी पक्षी
उड़ते हैं मुक्त गगन में
सुदूर पर्वतों तक
नदियों तक
कन्दराओं के मुहानों तक
समुद्र तटों तक
सुगम-दुर्गम द्वीपों तक
नापते हैं सरिता
सागर, समुद्र
खाड़ियाँ, झरनें
तथा महाद्वीप
बसेरों को बदलते हैं
बदलते हैं हवा और पानी
नापते हैं योजनों
दिशाओं का थाह लेते हैं
फिर भी लौट आते हैं पक्षी
अपने घर
अपने घोसलों
अपने धरती में।।
कौन सा वह बन्धन है? 
जो मुक्त होकर भी
उन्हें बाँधता है 
योजनों दूर जाकर भी
घर नहीं भूलता
घर का रास्ता उन्हें याद आता है
और फिर लौट आते हैं वे
उसी घरौंदे में।।

यथार्थ

रिश्ते-नाते, जान-पहचान औ हालचाल सब जुड़े टके से। टका नहीं यदि जेब में तो रहते सभी कटे-कटे से।। मधुमक्खी भी वहीं मँडराती मकरन्द जहाँ वह पाती ...