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Monday, April 13, 2020

वास्तविकता

वास्तविकता
हरियाली के बीच
पहाड़ में बहती
किसी नदी के
सुंदर चित्र सी
सदा सुंदर नहीं होती।
वास्तविकता
मूँगे की चट्टानों के
भव्य चित्रों सी
रंगबिरंगी भी
नहीं होती।
अपितु वह
इन्द्रधनुष सी होती है
सात रंग दिखाती है
पर दर्शन उसका
भयाक्रांत कर जाता है।
वास्तविकता
किसी पहाड़ के
पिछले पाट की भाँति
रंगहीन और
बंजर भी होती है।
वास्तविकता केवल
सघन वनों की हरियाली
चीरती लम्बी काली
सड़क नहीं होती
वह कंकरीला पथरीला
भाबर भी होती है।
@ममतात्रिपाठी 

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रिश्ते-नाते, जान-पहचान औ हालचाल सब जुड़े टके से। टका नहीं यदि जेब में तो रहते सभी कटे-कटे से।। मधुमक्खी भी वहीं मँडराती मकरन्द जहाँ वह पाती ...