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Sunday, November 26, 2017

मन वृद्ध नहीं होता

साभार: Google 

आत्मा अमर है
आत्मा अजर है
शरीर नश्वर है 
यह बात हम 
बचपन से सुनते हैं 
और इसे मानते हैं 
अपने मध्य देखते हैं 
लोगों को
जन्म लेते हुये
फिर मरते हुये। 
देखते हैं 
शैशवावस्था
बाल्यावस्था 
तरुणावस्था
युवावस्था 
प्रौढ़ावस्था 
और वृद्धावस्था। 
हम देखते हैं 
जीवन का पूरा चक्र
आदि से अन्त तक
और हम उस चक्र को
देखते हुये
स्वयं भी घूमते हैं 
और जीवन का अंतिम पड़ाव 
तय करते हुये
मृत्यु तक पहुँचते हैं। 
पर प्रश्न यह है कि 
क्या मन वृद्ध होता है?
मन प्रौढ़ होता है?
तो उत्तर यह है कि 
मन कभी बूढ़ा नही होता
वह सदा बच्चा बना 
रहता है 
और चिरयौवन के
आवरण से स्वयं को ढँके रहता है।
मन की अवस्था 
यौवन तक आकर
रुक जाती है 
टिक जाती है 
मन कभी 
बूढ़ा नहीं होता
न वृद्धावस्था 
चाहता है। 
और जिसका मन
हताश हो
बूढ़ा हो जाता है 
या स्वयं को
वृद्ध मान लेना है 
वह इस संसार से
अविलम्ब 
कूच कर जाता है। 
चल पड़ता है 
महाप्रस्थान पथ पर। 
जीवन का सत्य
यही है कि 
यहाँ सभी ज्ञानवृद्ध
होना चाहते हैं 
पर कोई
आयुवृद्ध नहीं होना चाहता। 
और मन को तो
कदापि बूढ़ा नहीं 
बनाना चाहता।। 

यथार्थ

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