Showing posts with label Butterfly. Show all posts
Showing posts with label Butterfly. Show all posts

Tuesday, November 21, 2017

प्रकृति तुम धन्य हो

प्रकृति तुम धन्य हो
उपेक्षा में अपेक्षा में
खोज लेती हो जीवन
और स्पन्दित हो उठती हो।
प्रकृति तुम धन्य हो
शोषण नजरअंदाज कर
तिरस्कार भूलकर
तुम पोषित करती हो
पृथ्वी का आँचल
रंगों से भरती हो।
प्रकृति तुम धन्य हो।
तुम्हीं से आग पा
जगती जागृत है।
तुम्हीं से पराग पा
मधुमक्खी रचती
मधु-अमृत है।
सबके जीवन का
आश्रय हो तुम
प्रकृति तुम धन्य हो।।

तितलियाँ

तितलियाँ
रंग-बिरंगी तितलियाँ
काली, कुछ नीली,
कुछ धानी-कजरारी
कुछ उज्जवल,
कुछ चंचल तितलियाँ।
कुछ चितकबरी
कुछ बूटेदार
लहरिया वाली तितलियाँ
कुछ छोटी कुछ बड़ी
कुछ मद्धिम कुछ तेज
यहाँ वहाँ उड़तीं
फूलों, पेड़ों, पत्तियों की
दूरियाँ नापती तितलियाँ।
छोटे से जीवन को
गिनती के दिनों को
अपने हिस्से के
मुट्ठी भर प्रकाश को
जिंदादिली से
हँसकर-खिलखिलाकर
रंग बनकर-बिखेरकर
मुक्त-मन से जीतीं तितलियाँ।।
जियो तो खुलकर जियो
रंग भर दो हर दिशा में
मुक्त - मन जीवन जियो
प्रकाश बन टिमटिमाओ निशा में।।
तितलियाँ तितलियाँ ही नहीं हैं
जीवन की आशायें हैं
तितलियाँ हैं तो रंग बिरंगी है प्रकृति
इन्द्रधनुषी दिशायें हैं।।

यथार्थ

रिश्ते-नाते, जान-पहचान औ हालचाल सब जुड़े टके से। टका नहीं यदि जेब में तो रहते सभी कटे-कटे से।। मधुमक्खी भी वहीं मँडराती मकरन्द जहाँ वह पाती ...