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Tuesday, November 21, 2017

गाँव का हेंवँत

गाँव में हेंवँत का सबेर
कुहरा का लबादा ओढ़कर आता था
पर...
पर देश की राजधानी में
दिनभर कुहरे सी चादर तनी है
पर यह कुहरा नहीं है
धुंध है
जो धूल और प्रदूषण को
आँचल में लिये
भीषण दिख रही है।।
पर...
आश्चर्य है कि
धुंध में ढँकी दिल्ली
अब भी हँस रही है।
या बेबस हो हँस रही है।

यथार्थ

रिश्ते-नाते, जान-पहचान औ हालचाल सब जुड़े टके से। टका नहीं यदि जेब में तो रहते सभी कटे-कटे से।। मधुमक्खी भी वहीं मँडराती मकरन्द जहाँ वह पाती ...