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Wednesday, November 22, 2017

तू बड़का बरवार नहीं?

वै काम करैं, तू कर तूरौ।
तुहँका घोहरावैं, तू घुइरौ।
पाँव पसारि कै तू सोवौ
औ उनके जागैऽप आँख तरेरौ।
अब बोलौ तू सत्तुवार नहीं ।
तू बड़का बरवार नहीं ।
*सत्तुवार=जिसके पास कोई काम न हो
*बरवार=जेबकतरे का एक प्रकार जो पीछा करके जेब काटता है।

Tuesday, November 21, 2017

तितलियाँ

तितलियाँ
रंग-बिरंगी तितलियाँ
काली, कुछ नीली,
कुछ धानी-कजरारी
कुछ उज्जवल,
कुछ चंचल तितलियाँ।
कुछ चितकबरी
कुछ बूटेदार
लहरिया वाली तितलियाँ
कुछ छोटी कुछ बड़ी
कुछ मद्धिम कुछ तेज
यहाँ वहाँ उड़तीं
फूलों, पेड़ों, पत्तियों की
दूरियाँ नापती तितलियाँ।
छोटे से जीवन को
गिनती के दिनों को
अपने हिस्से के
मुट्ठी भर प्रकाश को
जिंदादिली से
हँसकर-खिलखिलाकर
रंग बनकर-बिखेरकर
मुक्त-मन से जीतीं तितलियाँ।।
जियो तो खुलकर जियो
रंग भर दो हर दिशा में
मुक्त - मन जीवन जियो
प्रकाश बन टिमटिमाओ निशा में।।
तितलियाँ तितलियाँ ही नहीं हैं
जीवन की आशायें हैं
तितलियाँ हैं तो रंग बिरंगी है प्रकृति
इन्द्रधनुषी दिशायें हैं।।

यथार्थ

रिश्ते-नाते, जान-पहचान औ हालचाल सब जुड़े टके से। टका नहीं यदि जेब में तो रहते सभी कटे-कटे से।। मधुमक्खी भी वहीं मँडराती मकरन्द जहाँ वह पाती ...