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Monday, November 27, 2017

जब नयन हमारे मिले

साभार : Google 
आँख के तारे मिले
जब नयन हमारे मिले
द्युति थी तुम्हारी
पर पुतली की चमक में 
कुछ रंग हमारे मिले
आँख के तारे मिले
भावनायें बह चलीं
अन्तः व्यथायें कह चली
कुछ कथायें आगे बढ़ी
परस्पर भाव सारे मिले
आँख के तारे मिलें
कंठ स्तब्ध रह गया
मुँह मूक ही रखा
जिह्वा जड़ बनी रही
फिर भी सबकुछ कहा 
सब कुछ सुना
जब हृदय हमारे मिले
आँख के तारे मिले
नयन करण बन गये
असंख्य शब्द कह गये
श्रोत खाली रह गये
हृदय कथन से भर गये
जब तेज हमारे मिले
आँख के तारे मिले
न सुनाई न बताई
न देखी न दिखाई
न गयी न आयी
न छुपी न छुपायी
जब कथ्य हमारे मिले

आँख के तारे मिले। 

यथार्थ

रिश्ते-नाते, जान-पहचान औ हालचाल सब जुड़े टके से। टका नहीं यदि जेब में तो रहते सभी कटे-कटे से।। मधुमक्खी भी वहीं मँडराती मकरन्द जहाँ वह पाती ...