Showing posts with label पराग. Show all posts
Showing posts with label पराग. Show all posts
Thursday, November 23, 2017
Tuesday, November 21, 2017
प्रकृति तुम धन्य हो
प्रकृति तुम धन्य हो
उपेक्षा में अपेक्षा में
खोज लेती हो जीवन
और स्पन्दित हो उठती हो।
प्रकृति तुम धन्य हो
शोषण नजरअंदाज कर
तिरस्कार भूलकर
तुम पोषित करती हो
पृथ्वी का आँचल
रंगों से भरती हो।
प्रकृति तुम धन्य हो।
तुम्हीं से आग पा
जगती जागृत है।
तुम्हीं से पराग पा
मधुमक्खी रचती
मधु-अमृत है।
सबके जीवन का
आश्रय हो तुम
प्रकृति तुम धन्य हो।।
Subscribe to:
Posts (Atom)
यथार्थ
रिश्ते-नाते, जान-पहचान औ हालचाल सब जुड़े टके से। टका नहीं यदि जेब में तो रहते सभी कटे-कटे से।। मधुमक्खी भी वहीं मँडराती मकरन्द जहाँ वह पाती ...
-
वात्सल्यमयी माँ, एक विभूति है एक प्रेममयी विशिष्ट अनुभूति है। दया, ममता की वात्सल्य, करुणा की स्नेहमयी मूर्ति है॥ हमारी तृ...
-
माँ-बाप का दुत्कारत हैं औ कूकुर-बिलार दुलारत हैं यहि मेर पुतवै पुरखन का नरक से तारत है ड्यौढ़ी दरकावत औ ढबरी बुतावत है देखौ कुलदीपकऊ ...

