लाभ-हानि
जय-पराजय
यश-अपयश
जीवन-मरण
संसार का वह सत्य है
जिससे संसार चलता है
सृष्टि होती है
इसमें किसी एक का
न होना
संसार का रुकना है
प्रलय की ओर
बढ़ना है
सृष्टि का अंत है
अतः
अंधकार को सहन करने का
धैर्य होना चाहिए
उस छोर पर
प्रकाश प्रतीक्षा जो
कर रहा है।
No comments:
Post a Comment