हाँ मैं नहीं हूँ
तुम्हारे जैसी
न हूँ
उनके जैसी
मैं सभी जैसी
नहीं हूँ
क्योंकि
क्योंकि सभी
सबके जैसे
नहीं होते
सभी एक जैसे
नहीं होते
सभी अपने जैसे
होते हैं
और एक ही
होते हैं
यही सौन्दर्य है
यही विविधता है
इसका सम्मान करो
अन्यथा
यन्त्र तो एक सी
वस्तु बनाते ही हैं।
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